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सूचना अधिकार अधिनियम 2005
सी पी सी एल - सूचना प्रोद्योगिकी
 

1 तेल का पहला कुंआ कब खोदा गया ? तेल की पहली रिफाइनरी कब खोली गयी?
उत्तर तेल का पहला कुआ 1859 में खोदा गया। पहली रिफाइनरी 1861 में खोली गयी।

2. क्रुड ऑयल फ्रैक्शन्स कैसे अलग किये जाते हैं?
उत्तर एटमास्फियरिक और वैकुयम डिस्टीलेशन टावरों में प्रभाजन (फ्रैक्शेनेशन) द्वारा कच्चे तेल से हाइड्रोकार्बन के अणुओं को समूहों में विभिन्न कव्थनाकों के स्तर पर प्राप्त किया जाता है। इन्हें फ्रैक्शन अथवा कट्स कहा जाता है। क्रड ऑयल को गरम करके डिस्टीलेशन कॉलम में डाल दिया जाता है। अलग अलग तापमानों पर अलग उत्पाद प्राप्त होते हैं। सबसे कम तापमानों पर हल्के उत्पाद एल पी जी, नफथा, और गैसीलीन प्राप्त किये जाते हैं। इसके बाद, मध्यम डिस्टीलिएटस जेट फयूल, केरासीन और गैस ऑयल मिलते हैं। शुरूतर प्रभाजकों को वैकुयम के द्वारा प्राप्त किया जाता और इन्हें इन्हे फिर से संसाधित करके हल्के उत्पादों का पाया जा सकता है।

3. हाइड्रोकार्बन की संरचना की बदल देने वाली संपरिवर्तन प्रक्रिया क्या है?
उत्तर हाइड्रोकार्बन के आकार/संरचना को बदलने में प्रयुक्त संपरिवर्तन प्रक्रिया इस प्रकार है हाइड्रो, थर्मल और कैटालिटिक क्रेकिंग, कोकिंग और ब्रिसब्रेकिंग द्वारा अपघटन (विभाजन) अल्कीलेशन तथा पालीमराइजेशन द्वारा एकीकरण (संयुक्त करना) आइसोमारइजेशन तथा कैटालिटिक रिफार्मिंग से परिवर्तन ट्रीटमेन्ट प्रासेस

4. ब्लेडिंग क्या है ?
उत्तर ब्लेडिंग हाइड्रोकार्बन फैक्शन को संघठित करने तथा मिश्रित करने की प्रक्रिया है। इसमें अपेक्षित गुणों तथा विशिष्टियों के तैयार उत्पाद प्राप्त किये जाते हैं।

5. क्रैंकिंग क्या है
उत्तर क्रैंकिंग, पेट्रालियम रिफाइनिंग प्रक्रिया है जिसमें हाइड्रोकार्बन के गुरूतर भार वाले अणुओं को उष्मा ओर दाब का अनुप्रयोग करके हल्के हाइड्रोकार्बन अणुओं को विखन्डित किया जाता है। इसे उत्तप्रेरेख (कैटेलिस्ट) का प्रयोग करके अथवा बिना इसका प्रयोग किये किया जाता है जिससे विभिन्न प्रकार के फ्यूल उत्पाद प्राप्त होते हैं।

6. क्रैंकिंग के प्रकार बताइये ?
उत्तर थर्मल क्रैंकिंग एक रिफाइनरी प्रक्रिया है जिसमें उष्मा (800 डिग्री सेंटीग्रेड) और दबाव (700 किलों पास्कल) का प्रयोग होइड्रोकार्बन के अणुओं को विखडिंत करने फिर से अथवा संघटित करने के लिय किया जाता है।
स्ट्रीम क्रैंकिंग एक पेट्रो रसायन प्रक्रिया है जिसका प्रयोग रिफाइनरियों में कभी कभी ओलेफिनिक रा मैटेरियल्स (जैसे एथीलीन) को विभिन्न फीडस्टाक ईथेन से लेकर वेकुयम गैस ऑयल तक से बनाने में किया जाता है। इसे पेट्रोरसायन प्राप्त करने के लिया किया जाता हे। विस्ब्रेकिंग, थर्मल क्रैंगिंग का ही हल्का सवरूप है। यह क्वथनांक के स्तर को प्रभावित किये बिना भारी क्रूड ऑयल के अवशेष की श्यानता (चिपचिपहाट)को बहुत कम कर देता है।
कोकिंग, थर्मल क्रैंगिक कठोर विधि है जिसका प्रयोग भारी अवशेषों को अल्के उत्पादों अथवा डिस्टीलियेट्स के उन्नयन के लिये किया जाता है। जिससे गैसोलिन(कोकेर नफ्था) और विभि न् न डिस्टिलियेट फेक्शन प्राप्त होते हैं। जिनकों केटेलेटिक क्रेंकिंग फिडस्टाक के रूप में प्रयोग किया जाता है। केटेलिटिक क्रैकिंग जठिल हाइड्रोकार्बन को विखंडित करके साधारण अणुओं में बदल देती है । इससे अधिक हल्के तथा वांछनीय उत्पादों की गुणवत्ता तथा मात्रा में वृद्धि हो जाती है यह थर्मल क्रैंकिंग की तरह है बस अंतर इतना है कि उष्मा के स्थान पर कैटालिस्ट का प्रयोग किया जाता है। तरल कैटालैटिक क्रैंकिंग: उच्चतापमान पर उष्मा (1000 डिग्री फेरहेनहाइट) कम दबाव और चूर्णित कैटालिस्ट को एक रियेएक्टर में प्रयोग में लाया जाता है इसका प्रयोग बहुत भारी फेक्शनों को छोटे छोटे अणुओं में परिवर्तित करने के लिये किये जाते हैं। हाइड्रो क्रेंकिंग दो स्तर की प्रक्रिया है इसमें केटालिस्ट क्रेकिंग और हाइड्रोजनेशन मिली हुई है । इसमें अभिष्ट उत्पादों को तैयार करने के लिये उच्च तापमान और दबाव पर हाइड्रोजन की उपस्थिति में गुरूतर फिडस्टाक तोडे जाते हैं।

7. केटेलिक रिफार्मिंग क्या है? इसमें कोन कोन अभिक्रियाएं हैं?
उत्तर केटेलिटिक एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसका प्रयोग लो आक्टेन नफ्था को हाई आक्टेन गेसीलिन ब्लेंडिंग घटको जिन्हें रिफार्मेट्स कहा जाता है में परिवर्तित करने के लिये किया जाता है। रिर्फोमिंग अनेक अभिक्रियाओं जिसे क्रेंकिंग, पालीमराइजेशन, डिहाइड्रोजनेशन और आइसोमराइजेशन के साथ होने के सम्पूर्ण प्रभाव को प्रदर्शित करता
है।

8. हाइड्रोट्रिटिंग क्या है इसका महत्व क्या है?
उत्तर कैटालिटिक हाइड्रोट्रीटिंग एक हाइड्रोजेनेशन की प्रक्रिया है। इसका प्रयोग द्रव पेट्रोलियम फ्रेक्शनों से संदूषकों जैसे नाइट्रोजन सल्फर, ऑक्सीजन और धातुओं को निकालने के लिये किया जाता है।

9. हाइड्रो- डिसल्फराइजेशन क्या है?
उत्तर सल्फर को अलग निकालने के लिये, हाइड्रोट्रीटिंग करने को डिसल्फराइजेशन कहा जाता है । एक विशेष प्रकार की कैटालिटिक हाइड्रोंडिसल्फराइजेशन यूनिट में पहले से फायर्ड हीटर 320डीग्री सेन्टीग्रेट-420डीग्री सेन्टीग्रेट में फीडस्टाक को हाइड्रोजन में मिश्रित किया जाता है। इसके बाद एक किक्स्ड - बेड कैटालिटिक रिएक्टर के द्वारा दाब 70 किलों ग्राम/ से. मीटर स्कोयर तक में चार्ज किया जाता है। हाइड्रोटिटिंग में प्रयुक्त स्थितियों, निकाले जाने संदूषकों, प्रयोग किये गये फीडस्टॉक और कैटालिस्ट के आधार पर, भिन्न भिन्न होती है।

10. रिफाइनरी में प्राप्त होने वाले विशिष्ट उप- उत्पाद तथा सह - उत्पाद कौन- कौन से हैं?
उत्तर कोक सल्फर, रसायनिक तथा पेट्रोरसायनिक फीड स्टाक्स, वैक्स, हाइड्रोजन, ऐस्फाल्ट, प्रॉसेस ऑयल्स, पेट्रोलियम जेली आदि

11. क्रूड ऑयल का प्रीट्रीटमेन्ट किस तरह से किया जाता है?
उत्तर क्रूउ ऑयल में अक्सर पानी, अकार्बनिक लवण, प्रलंबित ठोस पदार्थ और पानी में धुली धातुएं होती हे। डिस्टीलेशन करने के पहले इन संदूषकों को निर्लवण करके डिहाइट्रेशन निश्चित रूप निकाल देना चाहिए जिससे कि संक्षारण, उपकरणों की खराबी को कम की जा सके और प्रॉसेसिंग यूनिटों में कैटालिस्टों के प्रदूषित होने की रोकथाम हो सकें। क्रूड ऑयल को निर्लवण करने की दो प्रमुख विधियाँ हैं- रासायनिक और इलेक्ट्रोस्टेटिक सेपरेशन। इनमें निष्कर्षण कारक के रूप में गरम पानी का इस्तेमाल किया जाता है।

12. रिफाइनरी में हाइड्रोजन कैसे तैयार की जाती है?
उत्तर कैटालिटिक रिफार्मर प्रॉडक्ट गैसों से मूलत: प्राप्त होने वाली उच्च शुद्धता 95 -99 की हाइड्रोजन, अधिकांशतया रिफाइनरी की कुल जरूरतों को पूरा करने के लिये काफी नहीं होती है। इसलिये प्राकृतिक गैस, और मुख्यतया नेफथा के स्टीम रिफार्मिंग से भी हाइड्रोजन प्राप्त की जाती है। गंधक के यौगिकों को निकालने के प्रीट्रीर्टमेंट के बाद नेफथा को स्टीम के सामिश्रित करके रिफार्मिंग फर्नेंस 6500- 850 डिग्री सेंटीग्रेड में ले जाया जाता है, जहाँ पर हाइड्रोजन तैयार की जाती है।

13. सल्फर कैसे बनाया जाता है?
उत्तर सल्फर की प्राप्ति हाइड्रोजन सल्फाठउ को अम्लीय गैसों में परिवर्तित कर देता है और हाइड्रोकार्बन तात्विक सल्फर में प्रवाहित होने लगते हैं। इसे प्राप्त करने की प्रयोग में ज्यादातर आने वाली प्रणाली क्लाअस प्रॉसेस है। जिसमें थर्मल और कैटालिटिक परिवर्तन अभिक्रियाएं दोनों ही प्रयोग की जाती है। नियंत्रित स्थितियों में हाइड्रोजन सल्फाइड को जलाने पर विशिष्ट प्रक्रिया के द्वारा तात्विक सल्फर तैयार किया जाता है।

14. मुख्य उत्पादों के लिय महत्वपूर्ण आवश्यकताएं क्या हैं?
उत्तर मोटर स्प्रिट (गैसोलीन) को मुख्य गुण हैं, ऑक्टेन नम्बर (एन्टीनॉक), वाष्पशीलता (स्टार्टिंग और वेपर लॉक) वाष्प दबाव (पर्यावरणीय नियंत्रण) और कम मात्रा में संदूषक एस एन आदि संकेन्द्रण डिस्टीलिएट फयूल जैसे डीजल फ्यूल्स जिनके क्वथनांक की लगभग 200 डिग्री सेन्टीग्रेट से 380 डिग्री सेन्टीग्रेट होती है। अभीष्ट गुणों में, नियंत्रित सल्फर, फलैश पाइंट और सीटेन नम्बर शामिल हैं।
द्रवीक्रृत पेट्रोलियम गैस एल पी जी को समुचित कार्य निष्पादन के लिये विर्निदेशों में वाष्प दबाव और संदूषकों को नियंत्रित करना शामिल है।
जेट फयूल ए टी एफ के रूप में प्रयुक्त केरोसीन का क्रान्तिक गुण है उसका हिमांक

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