1) कब पहले पहल तेल की कुआ खोदा गया? कब पहला रिफ़ाइनरि खोला गया?
A.पहला तेल की कुआ वर्ष 1859 में खोदा गया। पहला रिफ़ाइनरि 1861 में खोला गया।
2) क्रूड ऑइल फ्रैक्शन्स को कैसे अलग किया जाता है?
A.
वायु मंडलीय एवं हवा शून्य डिस्टिलेशन टावर में स्थूल रूप में हाईड्रोकार्बन मालक्युल्स के विभिन्न ग्रुप में, विभिन्न तापमान में जिसे फ्रैक्शन्स या कट कहा जाता हाई, अलग किया जाता है। क्रूड ऑइल को तापित करके डिस्टिलेशन कॉलम में डाला जाता है। विभिन्न तापमान में विभिन्न उपज हमें मिलती है। कम तापमान में ही हल्के उपज जैसे एलपीजी, नाप्ता, और स्ट्रेट रन गासोलीन पहले मिल जाती हैं। और तापमान बढ़ जाने से जेट ईंधन, केरोसिन, और गैस ऑइल क्रमशः पते हैं। भरी फ्रैक्शन्स को शून्य हवा में अलग किया जाता है और और चाहे तो पुनः प्रोसैस करके हल्के उपज पा सकते हैं।
3) हयड्रोकार्बोन स्ट्रक्चर को बदलने की प्रक्रिया क्या है?
A. आकार और/या हयड्रोकार्बोन मोलीक्यूल्स के स्ट्रक्चर को बदलने की प्रक्रिया में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:
- हाइड्रो, थर्मल और केटलिटिक क्रकिंग, कोकिंग व विसब्रेकिंग द्वारा डिकंपोस (अलग) किया जाता है।
- अलकाइलेशन और पोलिमेराइसेशन द्वारा जोड़ा जाता है।
- एसोमेराइसेशन और केटेलिटिक रीफ़ोर्मिंग द्वारा क्रम (आलट्रेशन किया जाता है) बदला जाता है।
- ट्रीटमेंट प्रक्रिया
4) ब्लेंडिंग क्या है?
A.हाइड्रोकार्बन फ्रैक्शन्स को मिलाकर एवं मिश्रित करके मन चाहत चीज़ों को इच्छानुरूप कार्य निष्पादन, गुण और आवश्यक विशिष्ट गुणों के साथ पाने की प्रक्रिया को ब्लेन्ड कहते है।
5) क्राकिंग क्या है?
A.
विभिन्न ईंधन उपज को पाने के लिए केटलिस्ट के प्रयोग के साथ या बिना, भारी मालिक्युलर वजनदार हाइड्रोकार्बन को लाइट हाइड्रोकार्बन के रूप में बदलने के लिए किए जानेवाले पेट्रोलियम रेफाइनिंग प्रक्रिया को क्राकिंग कहते है।
6) क्राकिंग के विभिन्न प्रकार
A.
थर्मल क्राकिंग जो रेफाइनिंग प्रक्रिया है जिसमें गर्मी (800°सी) और दबाव (700kPa) का प्रयोग करके हाइड्रोकार्बन मालिक्युल्स को तोड़ा, क्रम बदला, या जोड़ा जाता है।
भाप क्राकिंग पेट्रोकेमिकल प्रक्रिया कभी कभी रिफैनेरीस में विभिन्न फ़ीड स्टॉक रेंजिंग याने ईथेन से लेकर वाक्यूम गॅस ऑइल तक से पेट्रोकेमिकल उत्पादन के लिए ओलेफिनिक रॉ सामाग्री उत्पन्न करता है। (उदा – एथिलीन)
विसब्रेकिंग एक हल्का सा थर्मल क्राकिंग है, जो भारी क्रूड ऑइल रेसिड्यू को बोइलिंग पाइंट रेंज पर प्रभाव डाले बिना उसके लसलसाहट को काफी कम करता है।
भारी रेसिड्युयल्स को अपग्रेड करके हल्के उत्पादन या डिस्टिलेट्स पाने की भारी थर्मल प्रक्रिया है कोकिंग। स्ट्राइट-रन गासोलीन (कोकर नापता) और विभिन्न मिडल-डिस्टिलेट फ्रैक्शन्स को उत्पन्न करता है जो केटलिटिक, क्राकिंग फीडस्टाक के रूप मेय उपयोग किया जाता है।
केटलिटिक क्राकिंग, मिश्रित हाइड्रोकार्बन को सरल मालिक्युल्स के रूप में तोड़ता है ताकि गुणात्मक एवं संख्यात्मक वृद्धि हो, और वांछित उत्पादन को पावें। यह तो थर्मल क्राकिंग के जैसे ही है पर गर्मी के बजाई केटालिस्ट का प्रयोग किया जाता है।
फ्लुइड केटलिटिक क्राकिंग एलूट्रिएटेड (निर्मलीकरण) रियाक्टर में भारी गर्मी (~ 1,000 oF), कम दबाव, और पाउडर किए गए केटेलिस्ट का प्रयोग किया जाता है ताकि बहुत भारी फ्रैक्शन्स को छोटे छोटे मालिक्युल्स के रूप में परिवर्तित करने में उपयोगी है।
हहाइड्रोक्राकिंग, केटलिटिक क्राकिंग और हाइड्रोगेनेशान को मिलाकर किए जा रहे दो-स्तरीय प्रक्रिया है। जिसमें भारी फीडस्टॉक को हाइड्रोजेन होते वक्त उच्च तापमान एवं दबाव में क्राक करके अधिक वांछित उत्पादन पा सकते है।
7) केटलिटिक रीफ़ोर्मिंग क्या है? इसमें क्या क्या प्रतिक्रियाएँ होती है?
A.
केटलिटिक रीफ़ोर्मिंग एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसमें निम्न-ओक्टेन नेप्ता को उच्च-ओक्टेन गैसोलीन ब्लेंडिंग उपकरण जिसे रीफ़ोर्मेट्स कहते है के रूप में परिवर्तित किया जाता है।
रीफ़ोर्मिंग कई प्रतिक्रियाओं के प्रभाव को इंगित करता है जैसे क्राकिंग, पोलिमेराइसेशन, डीहाइड्रोजेनेशन और एसोमेरिसेशन जो एक साथ होता है।
8) हाइड्रोट्रीटिंग क्या है? इसकी उपयोगिता क्या है?
A.
द्रव्य पेट्रोलियम फ्रैक्शन्स में निहित अशुद्ध पदार्थों जैसे नाइट्रोजेन, सुल्फर, ओकसीजेन, और धातुओं को निकालने के लिए हाइड्रोजेनेशन प्रक्रिया का प्रयोग करते हैं, इसे केटलिटिक हाइड्रोट्रीटिंग कहते हैं।
9) हाइड्रो-डीसल्फ्यूरिसेशन क्या है?
A.
सल्फर को निकालने के लिए किए जानेवाले हाइड्रोट्रीटिंग को हाइड्रो-डीसल्फ्यूरिसेशनकहते है। टिपिकल हाइड्रो-डीसल्फ्यूरिसेशन यूनिट में फीडस्टॉक हाइड्रोजेन से मिश्रित रहता है, फायर्ड हीटर में पहले गरम किया जाता है (320°- 430°C) और नियत-बेड केटलिटिक रियाक्टर के जरिये दबाव में चार्ज किया जाता है (70 kg/cm 2 तक)। निकाले जानेवाले अशुद्धियों, फीडस्टॉक और उपयोग किए जानेवाले केटालिस्ट के आधार पर हाइड्रोट्रीटिंग की परिस्थितियाँ बदलती हैं।
10) स्थूल रूप में रिफ़ाइनरि से क्या क्या सह-उत्पादन और को-प्रोडक्टस मिलता है?
A.कोक, सल्फर, रसायन और पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक, वाक्स, हाइड्रोजेन, प्रोसेस ऑइल, पेट्रोलिउम जेल्ली ।
11) क्रूड ऑइल पूर्व ट्रीटमेंट कैसे किया जाता है?
A.
क्रूड ऑइल में प्रायः पानी, अजीविक नमक, सस्पैंड किए गए सालिड, और पानी में घुल जाने योग्य धातु होते हैं। डिस्टिलेशन के पूर्व, करोशन, प्लागिंग, और उपकरणों में होने वाली गलतियों को कम करने के लिए, और प्रक्रिया यूनिट में केटालिस्ट को विषैली न बनाने के लिए इन दूषित पदार्थों को डिसाल्टीङ्ग द्वारा (डिहाइड्राशन) निकालना है। क्रूड ऑइल के डिसाल्टीङ्ग के दो पद्धति में – केमिकल और इलक्टरों स्टेटिक – एक्स्ट्राक्शन एजेंट के रूप में गरम पानी का प्रयोग किया जाता है।
12) रेफेइनेरी में हाइड्रोजेन कैसे उत्पन्न किया जाता है?
A.
उच्च शुद्ध हाइड्रोजेन (95%-99%) मूलतः केटलिटिक रीफ़ोर्मर उत्पादन गैस से लिया जाता है पर रीफेईनेरी की सम्पूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं करता है।
प्राकृतिक गैस के भाप रीफार्मिंग और मुख्यतः नाप्ता से भी हाइड्रोजेन का उत्पादन होता है। पूर्व ट्रीटमेंट देने के बाद सलफर कांपौंड को निकालने के लिए भाप के साथ नाप्ता को मिश्रित किया जाता है और रीफ़ोर्मिंग फर्नस (650°-850°C) मे लिया जाता है जहाँ हाइड्रोजेन का उत्पादन होता है।
13) सल्फर का उत्पादन कैसे होता है?
A.
सल्फर रिकावेरी, हाइड्रोजेन सलफाइड को तीखे गैस मे परिवर्तित करता है और हाइड्रोकर्बों स्ट्रिंस को सल्फर के तत्व मे परिवर्तित करता है। बहुतों से उपयोग किए जानेवाले रिकावेरी प्रणाली क्लास प्रक्रिया है जिसमें दोनों याने थर्मल और केटलिटिक परिवर्तन प्रतिक्रियाएँ उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया सल्फर को नियंत्रित परिस्थितियों में हाइड्रोजेन सलफाइड को जलाकर सल्फर देता है।
14) प्रमुख उत्पादनों के लिए क्या क्या गुणात्मक आवश्यकता है?
A.
मोटर स्पिरिट (गैसोलीन) के महत्वपूर्ण आवश्यकता है आक्टेन नंबर (एंटीनाक), जल्दी परिवर्तित होने की क्षमता (प्रारम्भ और वेफ़र लॉक), वेपर दबाव (पर्यावरण नियंत्रण) और कम दूषण (एस, एन आदि)।
डिस्टिलेट ईंधन जैसे डीज़ल ईंधन जिसके उबलने का रेंज 200°-380°C तक है। इसमें वांछित गुण हैं नियंत्रित सल्फर, फ्लैश पॉइंट और सेटेन नंबर।
एलपीजी याने तरलीकृत पेट्रोलिउम गैस के सही कार्य निष्पादन के लिए महत्वपूर्ण वांछित गुण में वेपर दबाव और दूषण पर नियंत्रण है।
केरोसिन के लिए आवश्यक प्रमुख गुण जेट ईंधन के रूप में उपयोग करते वक्त, फ्रीज़ पॉइंट होना है।
रेसिडीयुल ईंधन के लिए आवश्यक दो प्रमुख तत्व हैं - पर्यावरण नियंत्रण के लिए कम सल्फर और लसलसाहट होना है ।